अल्मोड़ा- अल्मोड़ा के प्रवेश द्वार करबला पर स्वामी विवेकानंद द्वार के आगे स्थित मदिरा की उप दुकान को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर पार्षदों के एक शिष्टमंडल ने आज जिलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौपा।
ज्ञापन में कहा गया कि अल्मोड़ा एक सांस्कृतिक नगरी है। ऐसे में अल्मोड़ा नगर के प्रवेश द्वार जहां पर स्वामी विवेकानंद द्वार स्थित है उसके आगे मदिरा की उप दुकान का होना शहर की संस्कृति और पौराणिकता पर एक काला धब्बा है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा शहर की ऐतिहासिकता को देखते हुए अत्यंत आवश्यक है कि इस मदिरा की उप दुकान को यहां से अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया जाए।उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूति ने अल्मोड़ा में अपनी साधना की थी। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि स्वामी विवेकानंद की अल्मोड़ा यात्रा भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।यह कहा जाता है कि नगर के नगरवासी उन्हें घोड़े पर सवार करते हुए उन्हें बद्रीशाह के घर तक लाए थे तथा उनके द्वारा प्रथम भाषण रघुनाथ मंदिर की सीढ़ियों पर दिया गया था और लोगों द्वारा उनका भविष्य स्वागत किया गया था। उनकी यह यात्रा उनके आत्मिक विकास और संदेश फैलाने के प्रयास से जुड़ी हुई है। स्वामी विवेकानंद अपने भारत भ्रमण के दौरान देशभर में आत्म जागरण, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाने के लिए निकले थे। उनकी अल्मोड़ा यात्रा भी इसी उद्देश्य का हिस्सा थी। जहां उन्होंने विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा प्रवेश द्वार करबला पर विवेकानंद द्वार के समक्ष एक विदेशी मदिरा की दुकान इस इतिहास पर आज भारी पड़ रही है जिससे समस्त जनता इस मदिरा की दुकान के खिलाफ है।ज्ञापन के माध्यम से अपील की गई कि अल्मोड़ा के प्रवेश द्वार से इस मदिरा की दुकान को स्थानांतरित करके सांस्कृतिक नगरी के अस्तित्व को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।ज्ञापन सौंपने वालों में पार्षद वैभव पांडेय, अनूप भारती, विकास कुमार, मधुबिष्ट, चंचल दुर्गापाल, भूपेन्द्र जोशी, हेम तिवारी, गुंजन सिंह चम्याल, प्रदीप कुमार, दीपक कुमार, रोहित कार्की , इंतखाब क़ुरैशी आदि पार्षद मौजूद रहे।


